आदरणीय पशुपालकगण कृपया ध्यान दें की उत्तर भारत में बढते तापमान के साथ खुरपका-मुंहपका रोग (Foot & Mouth Disease) की संभावना भी बढ़ रही है I आप जानते ही हैं की यह पशुओं में होने वाला अत्यधिक संक्रामक विषाणुजन्य रोग है, जो गाय, भैंस, बकरी – भेड़ आदि में तेजी से फैलता है।
प्रारंभिक लक्षण
तेज बुखार (104-106°F), जो 1-3 दिन रहता है।
मुंह से अत्यधिक चिपचिपी लार टपकना और झाग बनना।
सुस्ती, भूख न लगना, जुगाली बंद हो जाना।
प्रमुख शारीरिक लक्षण
मुंह, जीभ, मसूड़ों और होंठों के अंदर छोटे-छोटे छाले, जो फूटकर घाव बन जाते हैं।
खुरों के बीच और आसपास छाले, सूजन, लंगड़ापन या पैर पटकना।
दुधारू पशुओं में दूध उत्पादन में भारी कमी।
गंभीर प्रभाव
घावों में कीड़े लगना, थनों या पूंछ पर छाले (कभी-कभी)।
गर्भवती पशुओं में गर्भपात, संकर नस्लों में मृत्यु का खतरा।
ठीक होने के बाद भी लंगड़ापन या कमजोरी बनी रह सकती है।
मुख्य रोकथाम के उपाय
नियमित टीकाकरण: पशुओं को वर्ष में दो बार (मानसून पूर्व और बाद) FMD वैक्सीन लगवाएं I 4 माह आयु से ऊपर के बछड़ों का टीकाकरण अनिवार्य रूप से करवाएं ।
टीकाकरण समय-सारिणी
प्रथम डोज: 4 माह की आयु पूरी होने पर (बछड़े/बछिया के लिए)।
द्वितीय डोज: प्रथम डोज के 4-6 माह बाद, विशेष रूप से मानसून से पहले (अप्रैल-मई)।
वार्षिक बूस्टर: हर वर्ष मानसून के बाद (अक्टूबर-नवंबर) दोहराएं।
गाय-भैंस जैसे पशुओं के लिए दो बार सालाना टीकाकरण आदर्श है। गर्भवती मवेशियों को टीका न लगाएं और पशु चिकित्सक से सलाह लें।
बाड़े में स्वच्छता बनाए रखें: बाड़े को साफ रखें, बीमार पशुओं को अलग करें, और दूध देने वाले बर्तनों को कीटाणुनाशक से धोएं।
संक्रमण स्रोतों से बचाव: बीमार पशुओं, उनके दूध, गोबर या हवा से संपर्क न होने दें; नए पशु लाने से पहले क्वारंटीन करें।
अतिरिक्त सावधानियां
पशुओं को हरी घास दें, सूखा चारा न दें, और फिनाइल या नीम के पानी से खुर-मुंह साफ करें।
मक्खियों को दूर रखने के लिए मलहम लगाएं और पशु चिकित्सक से सलाह लें।
गर्भवती पशुओं पर विशेष ध्यान दें, क्योंकि इससे गर्भपात हो सकता है।
यह रोग दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन को बुरी तरह प्रभावित करता है, इसलिए समय पर रोकथाम जरूरी है। इसके अलावा मध्य भारत में लम्पी स्किन रोग और सम्पूर्ण भारत में थनैला रोग () का अलर्ट भी ज़ारी हुआ है I तकनीकी जानकारी या सहायता के लिए आप अपने जिला पशुपालन विभाग या भा०कृ०अ०प० – केन्द्रीय बकरी अनुसंधान संस्थान या भा०कृ०अ०प० – केन्द्रीय भेड़ व् ऊन अनुसंधान संस्थान से सम्पर्क कर सकते हैं जो हमेशा आपकी सहायता में तत्पर रहते हैं I
यदि आकस्मिक सहायता की आवश्यकता हो, तो आप सीधा हमसे सम्पर्क कर सकते हैं:
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